डीएवी पब्लिक स्कूल सीसीएल गिरिडीह में स्वामी दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती पर त्रिदिवसीय जन्मोत्सव बड़े

धूम धाम मनाया गया।. इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य भैया अभिनव कुमार ने महर्षि दयानंद की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित व माल्यार्पण किया. इसके बाद विद्यालय के छात्र-छात्राओं के द्वारा हवन का भी आयोजन किया गया।इस अवसर पर विद्यालयको रंगीन बल्व की झालरों से सजाया गया एवं संगीत शिक्षक के द्वारा संध्याकालीन भजन भी किया गया। विद्यालय के प्राचार्य भैया अभिनव कुमार ने कहा कि स्वामी दयानंद आधुनिक भारत के चिंतक व आर्य समाज के संस्थापक थे. उन्होंने स्वामी जी के जीवन से छात्र व छात्राओं को अवगत कराया. बताया कि वेदों के प्रचार के लिए मुंबई में आर्य समाज की स्थापना की थी. ”वेदों की ओर लौटो यह उनका ही प्रमुख नारा था. उन्होंने कर्म सिद्धांत, पुनर्जन्म तथा संन्यास को अपने दर्शन का स्तम्भ बनाया. उन्होंने ही सबसे पहले 1876 में ”स्वराज्य” का नारा दिया. बाद में लोकमान्य तिलक ने इसे आगे बढ़ाया. महर्षि दयानद ने तत्कालीन समाज में व्याप्त सामाजिक कुरीतियों तथा अंधविश्वासों व पाखंडों का विरोध किया था।मौके पर वरीय शिक्षक अर्जुन कुमार, ने कहा कि दयानंद सरस्वती में देशभक्ति की भावना प्रबल थी. वह 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले अग्रिम पंक्ति के लोगों में शामिल थे। इस मौके पर मिसेस एस. रब्बानी समस्त शिक्षक-गण व छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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