आत्मविश्वास, आत्म संयम और आत्म नियंत्रण- युवा दिगभ्रमित न हों और इनका पालन करें -प्रोफेसर शिवानी अग्रवाल

आत्मविश्वास, आत्म संयम और आत्म नियंत्रण- युवा दिगभ्रमित न हों और इनका पालन करें -प्रोफेसर शिवानी अग्रवाल

आज के युवाओं का जीवन अनगिनत चुनौतियों का सामना कर रहा है| प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है और भारत जैसे देश में नौकरियां ढूंढना अत्यंत कठिन और असंभव सा हो गया है| गलाकाट प्रतिस्पर्धा और नौकरियों के कम होते बाजार ने युवाओं के लिए परेशानियां और भी ज्यादा बढ़ा दी हैं|कॉलेज जीवन विद्यार्थियों के लिए वह प्लेटफार्म है जिस पर वह अपना जीवन बना सकते हैं और अपने कैरियर को एक नई दिशा व दशा दे सकते हैं ,लेकिन कॉलेज जीवन एक भंवर जाल भी लेकर आता है, जब विद्यार्थियों का परिचय मुक्त वातावरण से होता है |सपनों की एक नई दुनिया सतरंगी पंख फैलाए युवाओं का आलिंगन करने के लिए तैयार रहती है| आज के युवा के पास दुर्भाग्यवश कोई मोटीवेटिंग फैक्टर नहीं है| माता पिता को पैसा कमाना है और पैसा कमाने की जद्दोजहद ने उन्हें उनके बच्चों से बहुत दूर कर दिया है| घर परिवार में साथ बैठकर बातचीत करने के लिए मुश्किल से ही किसी के पास 5 मिनट होते हैं |शिक्षकों से घनिष्ठता मुश्किल से ही हो पाती है| मित्र मंडली गलत राह पर ले जा सकती है|ऐसे में युवाओं को गंभीरता पूर्वक अपने कैरियर के बारे में निर्धारण करना होगा |उन्हें सही और गलत के बीच में अंतर खुद पहचानना होगा ,क्योंकि आखिर यह उनका खुद का भविष्य है|

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आत्मविश्वास, आत्म संयम और आत्म नियंत्रण यह तीनों ऐसे मोटीवेटिंग फैक्टर्स हैं,जिनका अनुपालन करने से जीवन खुद-ब-खुद एक सही दिशा की ओर अग्रसर होता जाएगा|

अब आते हैं युवाओं के जीवन की सबसे बड़ी समस्या प्यार, दोस्ती और मित्रता पर| मेरे प्यारे दोस्तों मित्रता तो जीवन का आधार है| प्रेम जीने का संबल है, दोस्ती वह चीज है जिसने इतिहास बदल दिए| बस आपको सही आयाम पर ,सही समय पर, सही लोगों से दोस्ती करनी है |दोस्ती का मतलब है एक और एक ग्यारह होना |दोस्ती का मतलब है एक दूसरे को सजाना,संवारना और संभालना ,एक दूसरे को आगे बढ़ाना, क्योंकि अकेले आप अकेले ही हैं और एक और एक मिलकर ग्यारह हैं, तो दोस्ती के नए मायने इजाद करिए और दोस्ती को एक नई पहचान दीजिए| अपनी दोस्ती को मिसाल बना दें कुछ नये काम करें ,अपने जीवन को एक नई पहचान दें, अपने युवा होने का मकसद पूरा करें समाज के लिए अपनी जिम्मेदारियां पूरी करें |अपने व्यक्तित्व के संपूर्ण विकास के लिए तरह-तरह की पाठ्य सहगामी गतिविधियों में भाग लें| समाज सेवा से जुड़ें, प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पहचानें| इसी तरह के बहुत सारे काम आप दोस्तों के साथ मिलकर कर सकते हैं |याद रखें पाश्चात्य सभ्यता का अनुपालन करना और अपना समय बर्बाद करना आपका उद्देश्य कदापि भी नहीं है|

प्रोफेसर शिवानी अग्रवाल

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