सच को सच कहने से, हम क्यों डरते हैं,

सच को सच कहने से, हम क्यों डरते हैं,
सच का सच सुनने से भी, क्यों डरते हैं?
भाव भंगिमा और विचार, हमारे अपने,
अपने अनुभव साझा करने, क्यों डरते हैं?

कोई कहता ऐसा लिखो, कोई वैसा लिखो,
हिन्दु को हिन्दू पर मुस्लिम को मत लिखो।
हिन्दू बांटा जाति धर्म, मुस्लिम एक बताते,
देशभक्तों पर बहस, गद्दारों पर मत लिखो।

आभासी दुनिया में भी खेल हुआ अनोखा,
बिन पूछे ही ग्रुप में जोड़ें, पर पूछकर लिखो।
नये नये नियम बतलाते, कहीं पटल विश्राम कराते,
नाराजी से बचना चाहो, उनके मन की बातें लिखो।

अ कीर्ति वर्द्धन