गोविंद प्रीति में हुई बाबरी लोक लाज सब भूल गई

गोविंद प्रीति में हुई बाबरी
लोक लाज सब भूल गई
हरपल पाऊँ सानिध्य हरि
माधव स्नेह मशगूल हुई

राधा के मन मन्दिर में तो
रहती है कृष्णा की झांकी
मन मोहन को पाकर के
रहती न कोई इच्छा बाकी

हरि से राधा राधा से हरि
राधे कृष्ण से सब जहान
शक्ति प्रकृति से यह सृष्टि
राधे कृष्ण सुखों की खान।

सत्यप्रकाश पाण्डेय