योग क्यों जरूरी है

योग क्यों जरूरी है

योग क्या है क्यों करना चाहिए हमें योग आखिर एकमात्र स्वस्थ रहने का ही तो साधन है योग वह तो हम जिम में भी जाकर प्राप्त कर सकते हैं ऐसे कई सवाल, जिसका अर्थ हम सब यही समझते हैं
मगर योग जीवन की वह कड़ी है जो शारीरिक स्तर पर ही नहीं मानसिक स्तर पर बेहद बल प्रदान करती है आइए जानते हैं कैसे……….
छठी शताब्दी ईसा पूर्व में महान व्याकरण विद पाणिनी द्वारा योग शब्द संस्कृत के *यूजर* शब्द से लिया गया था जिसका अर्थ है जोड़ना, एकाग्रता ,पूर्ण नियंत्रण
योग हमारी शरीर मन ,इंद्रियों और श्वास को नियंत्रित कर वह एकाग्रता, ध्यानमग्नता स्थापित करता है जो हमें आध्यात्मिक यात्रा की और ले जाती है।
अर्थात आत्मा का परमात्मा से मिलन ही योग है और इस स्थिति को प्राप्त करने में सहायक वह एकाग्रता और ध्यानमग्नता सिर्फ योग से ही प्राप्त है।

पतंजलि योग सूत्र में भी कहा गया है —
*योगाशश्वितवृत्तिनिरुद्धः* —–
अर्थात हम जीवन भर जिन अपनी वृत्तियों से परेशान रहते हैं योग उन पर अंकुश लगा देता है ।

भागवत गीता में भी कहा गया है ……

*समत्व योग उच्यते —*
योग प्रतिकूल परिस्थितियों में भी हमेशा सम भाव से रहना सिखाता है।

*योगा कर्मसु कौशलम—-*
योग आपके कार्य को कुशलता प्रदान करता है और आपके अंदर छुपी हुई प्रतिभाओं को उजागर करता है l

सपना अग्रवाल
(योग प्रशिक्षक एवं लेखक )
स्वरचित एवं मौलिक