हाथ जोड़ने के बजाए, जनता को एहसानों तले दबा रहे भावी उम्मीदवार

हाथ जोड़ने के बजाए, जनता को एहसानों तले दबा रहे भावी उम्मीदवार,

भावी उम्मीदवारों ने शुरू किए दरवाजे खटखटाने,
क्षेत्र की जनता कुछ उम्मीदवारों से मोड़ रही मुंह,
सचिन धवन,
शाहपुर,, विधानसभा चुनाव के बाद निकाय चुनाव की सरगर्मी क्षेत्र में बढ़ती जा रही है जिसके चलते भावी उम्मीदवार क्षेत्र में जनता का मन टटोलने में लगे हैं साथ ही लोकडाउन के की गई जनता की मदद को भी जनता को याद दिला रहे हैं,
उम्मीदवार जनता के पास पहुंच हाथ जोड़ने से पहले उन्हें यह कह कर बेइज्जत करते हैं,कि किस तरह लॉकडाउन में उन्होंने उनकी रोटी कपड़ा, और पैसों से मदद की है, क्षेत्र की जनता ऐसे भावी उम्मीदवारों को उनके सामनेे तो वोट देने का वादा कर रही है, लेकिन बाद में उन्हें धिककार रही है,कि यह उम्मीदवार क्या सेवा करेगा जो अभी से उन्हें नीचा दिखाने की चेेष्टा रहा है,
ज्ञात हो कि चुनाव में उम्मीदवारोंं की जीत का रास्ता गरीबों की बस्ती से होकर ही गुजरता है, ऐसे में भावी उम्मीदवारों ने गरीबों की बस्तियों में सुबह शाम आना-जाना शुरु कर अपने दिनचर्या में शामिल कर लिया हैै, बस्ती के कुछ लोगों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि उम्मीदवार जीतने के बाद इन गरीब बस्तियों से पूरी तरह से बाय काट कर लेते हैं किये गये वादों को पूरा करने के लिए पुरे 5 साल इन गरीब बस्तियों में वापस लौट कर नहीं देखते, गरीब बस्तियों के लोगों को केवल वोट देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, उम्मीदवार पहले जिन वादों को पूरा करने के लिए चुनाव मैदान में आए थे अब फिर उन्हीं वादों को पूरा करने के लिए जनता का फिर से गांठना शुरू कर दिया है, जनता दबी जुबान से पूछती है कि 5 साल नगर पंचायत कुर्सी पर राज करने के बाद भी कस्बे में विकास कार्य नहीं करा सका वह इस बार क्या विकास कराये गा,

साथ ही एक बिरादरी के कई उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरने को तैयार खड़े हैं, सियासी माहौल गर्म होते देख पूर्व में चुनाव लड़ चुके उम्मीदवार भी कस्बे की गरीब बस्तियों में जाकर जनता का हाल-चाल पूछ रहे हैं,गरीब बस्तियों के जिम्मेदारों का कहना है कि क्या एक ही बिरादरी कस्बे में नगर पंचायत अध्यक्ष कुर्सी पर बैठेने के लायक है,
जबकि विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि कुछ भावी उम्मीदवारों के आवासों पर स्थित कार्यालयों पर देर शाम नाबालिक युवकों को शराब का आनंद भी दिलाया जा रहा है वैसे देखा जाए तो कुछ भावी उम्मीदवार प्रचंड बहुमत में राज कर रही पार्टी का सिंबल लेने की जुगत में लगे पड़े हैं, और उन्होंने पार्टी के बड़े नेताओं से नजदीकया बढ़ानी शुरू कर दी है,क्योंकि उनकी धारणा है कि प्रचंड बहुमत में राज कर रही पार्टी का सिंबल लेने से उनकी जीत का रास्ता आसान हो जाएगा,लेकिन क्या क्षेत्र की जनता इन भावी उम्मीदवारों को निकाय चुनाव में पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठायेगी, ये तो भविष्य के गर्भ में छिपा है,