रे रंग रसिया रे मन बसिया मेरा हृदय कृष्ण आगार

रे रंग रसिया रे मन बसिया
मेरा हृदय कृष्ण आगार
पल पल साथ चाहूं तुम्हारा
तुम ही राधा के आधार

डार मोहिनी मोह ली तुमने
हरि बृषभानु की कुमारी
सोते जगते माधव को रटती
हे नन्दनंदन कुंजबिहारी

तेरी मुरली अधरों पर धारूँ
मैं जीवन के सुख वारूँ
श्याम सोम की बन चंद्रिका
प्रभु कभी नहीं विसारूं।

सत्यप्रकाश पाण्डेय

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