कुलभूषण जाधव मामला: भारतीय अधिकारी ने पाकिस्तानी अटॉर्नी जनरल से नहीं मिलाया हाथ, भारत ने रखा अपना पक्ष

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*कुलभूषण जाधव मामला: भारतीय अधिकारी ने पाकिस्तानी अटॉर्नी जनरल से नहीं मिलाया हाथ, भारत ने रखा अपना पक्ष*

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तल्खी चरम पर है। इसका उदाहरण आज द हेग में अंतरराष्ट्रीय कोर्ट (आईसीजे) में भी देखने को मिला। भारतीय अधिकारी दीपक मित्तल ने पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद अनवर मंसूर खान से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया। इसके बाद आईसीजे में कुलभूषण जाधव मामले में भारत ने अपना पक्ष रखा। बाद में कोर्ट की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई.

कुलभूषण जाधव मामले में भारत की तरफ से वरिष्ठ वकील पूर्व सॉलीसिटर जनरल हरीश साल्वे ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि यह ऐसा दुर्भाग्यपूर्ण मामला है जहां एक निर्दोष भारतीय की जिंदगी दांव पर है। पाकिस्तान का पक्ष पूरी तरह से जुमलों पर आधारित है, तथ्यों पर नहीं।’’

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सैन्य अदालत में इस मामले में जो ट्रायल हुए उनमें न्यूनतम आदर्शों का पालन भी नहीं किया गया। पाकिस्तान का दावा है कि जाधव को गिरफ्तार किया गया, लेकिन भारत के पास सबूत है कि जाधव का अपहरण किया गया था। राजनयिक मदद दिए बिना जाधव को हिरासत में रखे जाने को गैरकानूनी माना जाए।

हरीश साल्वे ने कहा, ’30 मार्च 2016 को भारत ने कुलभूषण जाधव को काउंसलर एक्सेस देने को लेकर पाकिस्तान को रिमाइंडर भेजा था। भारत को पाकिस्तान की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद अलग-अलग तारीखों पर भारत की तरफ से 13 रिमाइंडर भेजे गए।’ ऐसे में जाधव को बिना किसी देरी के राजनयिक सहायता देने के लिए पाकिस्तान बाध्य है। पाकिस्तान ने गिरफ्तारी की तारीख का भी खुलासा नहीं किया है। जाधव के संबंध में भारत को कोई जानकारी भी नहीं दी गई।

हरीश साल्वे ने कहा कि पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव के अधिकारों का उल्लंघन किया है। पाक मिलिट्री कोर्ट की सुनवाई सही तरीके से नहीं की गई। जाधव को वकील तक नहीं दिया गया और उसे मौत की सजा सुना दी गई। कुलभूषण जाधव के खिलाफ जासूसी के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं और पाकिस्तान उनके खिलाफ आरोप सिद्ध करने में भी नाकाम रहा है। वह केवल आईसीजे का इस्तेमाल प्रोपेगैंडा के लिए कर रहा है। इसके बाद कोर्ट की कार्रवाई मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।